Tuesday, 1 May 2018

अंतराष्ट्रीय श्रमिक दिवस - श्रमिक: किसी भी देश का असली निर्माता

1 मई : अंतराष्ट्रीय श्रमिक दिवस

किसी भी देश की तरक्की उस देश के किसानों तथा कामगारों (मजदूर / कारीगर) पर निर्भर होती है। एक मकान को खड़ा करने और सहारा देने के लिये जिस तरह मजबूत “नीव” की जरूरत होती है,  वैसे ही किसी देश, समाज, संस्था, बिज़नेस को खड़ा करने के लिये कर्मचारियों की विशेष भूमिका होती है।

 दिवस उन श्रमिक वर्ग को समर्पित है जो अपना खून-पसीना बहा कर अथक परिश्रम कर के विश्व के विभिन्न हिस्सों में दिन रात काम करके उस देश की प्रगति में अपना अमूल्य योगदान देते हैं।

इस दिन विश्व भर की लगभग हर कंपनी, फैक्ट्री, संस्था का अवकाश घोषित है, ये कर्मचारियों को सम्मान देने के लिए किया जाता है 

मुझे मजदूर दिवस पर दिनकर जी की कविता याद आती है  :-

मैं मजदुर हूँ मुझे देवों की बस्ती से क्या!
अगणित बार धरा पर मैंने स्वर्ग बनाये,

 अम्बर पर जितने तारे उतने वर्षों से,
 मेरे पुरखों ने धरती का रूप सवारा;
धरती को सुन्दर करने की ममता में, 
बीत चुका है कई पीढियां वंश हमारा.
अपने नहीं अभाव मिटा पाए जीवन भर, 
पर औरों के सभी अभाव मिटा सकता हूँ;
युगों-युगों से इन झोपडियों में रहकर भी, 
औरों के हित लगा हुआ हूँ महल सजाने.
ऐसे ही मेरे कितने साथी भूखे रह, 
लगे हुए हैं औरों के हित अन्न उगाने;
इतना समय नहीं मुझको जीवन में मिलता, 
अपनी खातिर सुख के कुछ सामान जुटा लूँ.

पर मेरे हित उनका भी कर्तव्य नहीं क्या? 
मेरी बाहें जिनके भारती रहीं खजाने;
अपने घर के अन्धकार की मुझे न चिंता, 
मैंने तो औरों के बुझते दीप जलाये.

मैं मजदुर हूँ मुझे देवों की बस्ती से क्या?
अगणित बार धरा पर मैंने स्वर्ग बनाये। 

आप भी पढ़े ,और अपने घर, परिवार के ,पड़ोस के हर व्यक्ति का  सम्मान करें 
याद रखिये,
मेहनत करने वाला हर व्यक्ति मजदूर होता है ,
मेहनत करने का तरीका अलग हो सकता है बस ,पर अपना घर परिवार चलाने को मजदूरी तो सब करते है ।

शेयर करें आपके विचारों का स्वागत है।

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