Sunday, 21 January 2018

बेरोजगारी : भूख और गरीबी की ओर बढ़ता डिजिटल भारत

पीएम मोदी के जवाब के संदर्भ में -

ये शीर्षक मैंने इसलिए दिया है ,देश डिजिटल तो हो रहा है परन्तु  ये Digitalization लोगों को खाना देने की बजाय उन्हें ही खा रहा है ।

आज भारत जो एक विशाल देश है जिसकी 60- 65% आबादी युवाओं की है उस देश में बेरोजगारी आम समस्या नहीं हो सकती ।

आज देश में ग्रेजुएट लोग सफाई कर्मचारी जिसके लिए कोई योग्यता जरूरी नहीं वो काम करने के लिए मजबूर है जो जिस काम में परफेक्ट उसे वो काम नहीं मिल पा रहा है ।

अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब डिजिटल इंडिया की बात कर रहे इस देश में भूखों मरने की नौबत आ जाये तो आश्चर्य नहीं होना चाहिये ।

देश में बढ़ती बेरोजगारी न सिर्फ देश की प्रगति में बाधक है बल्कि उसके कारण कई लोग देश में हिंसा ,लूटपाट जैसे जघन्य अपराधों को भी अंजाम दे रहे है ।
इन अपराधों का बेरोजगारी से एक बहुत गहरा नाता है अगर सोचा जाए तो।
डिजिटल इंडिया की बात कर रहे इस देश में बेरोजगारी इतना बड़ा अभिशाप है जिसका निवारण अभी नही किया गया तो ये डिजिटल इंडिया सिर्फ एक ख्वाब बन कर रह जायेगा ।

एक टी.  वी . चैंनल पर दिए गए इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा वो निंदनीय है ,
जब देश के पीएम पकोड़े बेचने वाले, रेहड़ी लगाने वाले को देश का रोजगार वाला समझते  है तो ये बहुत ही निराश करता है कि क्या जनता ने इस सरकार को पकोड़े बेचने वाले बनाने वाले के लिए चुना , पीएम को उस रेहड़ी लगाने के कारण का पता नहीं लगाया की क्या कारण है कि एक ग्रेजुएट ,पढ़ा लिखा व्यक्ति ये काम करने के लिए मजबूर है ।

आज हर एक सरकारी ऑफिस में लाखों पद खाली पड़े हुए हैं उन्हें भरने की बजाय सरकारी की ये मंशा वाकई निराश करने वाली है ।

देश में सरकारी कार्यालयों में स्टाफ की कमी के कारण ही सरकारी योजनाओं का लाभ जनता के पास नहीं पहुंच पाता क्योंकि उन्हें उन लोगों तक पहुंचाने के लिए लोग ही नहीं है तो कौन पहुंचाए।
ये बेरोजगारी एक दिन में खड़ी हुई समस्या नहीं है

सरकार चाहे देश पर 6 दशक से राज करने वाली कांग्रेस हो या BJP की हो जो इसी मुद्दे को लेकर सत्ता में आई थी आज 4 साल बाद भी  असफल रही है ।
1947 में लोग अपने जीवन यापन के लिए चाय पकोड़े बेचा करते थे और आजादी के 70 साल बाद भी चाय पकोड़े ही बेचे तो देश में कितना विकास हुआ है सबको पता चलता है ।

सरकारी तन्त्र का निजीकरण करने की सरकार की नीयत पर मैं कहना चाहूंगा है कि सरकार क्या इस देश को बेचना चाहती है ?
देश को अच्छा बनाने के लिए  लोगों को रोजगार दीजिये ,विभागों को बेचिए मत । सरकारी विभागों के खाली पड़े पदों को भरिये फिर देखिए कि कैसे देश बदलता है ।
सरकार के लिए कहता हूँ कि लोगों को पकोड़े बेचने के लिए मजबूर करने बन्द करिये और नहीं तो याद रखिये कि जो जनता आपको अर्श पर पंहुचा सकती है वो 2019 में फिर से फर्श पर पंहुचाने का माद्दा भी रखती है।

इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि पीएम तक बात पंहुचे ।
आपके विचारों का स्वागत है ।
ये मेरे निजी विचार है जो पीएम के जबाब में लिखे है किसी गलती के लिए क्षमा कीजिएगा ।

हिंदी - मेरी प्यारी भाषा

हिंदीदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं हिंदी भाषा है, बोली है, ज़बान है, हिंदी से देश का मान-सम्मान है। हिंदी का सांस्कृतिक और वैचारिक महत्व...