Saturday, 4 November 2017

मौत के रनवे - जिंदगी को लीलती रफ्तार

# मौत के रनवे #

आज देश के कई हिस्सों में एक्सप्रेस वे का निर्माण चल रहा है लेकिन क्या उस राज्य की सरकार उन एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा के इंतज़ामों को लेकर संजीदगी दिखा रही है ? तो इसका जबाब है नहीं।
ऐसे ही उत्तरप्रदेश के यमुना एक्सप्रेस वे और आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे का हाल है ,एक्सप्रेसवे बना दिये गए है वोटों के लिए लेकिन क्या इनसे जनता को फायदा हुआ ? तो सुरक्षा के नजरिये से जबाब नहीं।
एक्सप्रेस वे बनना किसी भी प्रदेश में विकास के नए मार्ग खोलता है किंतु उत्तरप्रदेश के ये दो एक्सप्रेस वे ने मौत के द्वार खोल रखे है । यमुना एक्सप्रेसवे जो बसपा सरकार में बना था इससे दिल्ली आगरा की दूरी तो कम हुई किन्तु इसके साथ मौत की दूरी भी कम हुई है , इसका कारण है कि किसी भी सरकार ने इस पर सुरक्षा को लेकर कोई पहल नहीं की है।यहाँ पुलिस चौकियाँ तो बनी है लेकिन यहां पुलिस सक्रिय नही है, पुलिस किसी भी घटनास्थल पर तब पहुंचती है जब वहां लूटपाट, बलात्कार जैसी जघन्य अपराधों को अंजाम दे दिया जाता है।
ऐसा ही हाल एम्बुलेंस सेवा का है, वो भी तब पहुँचती है जब कोई घायल दम तोड़ देता है ।

सुरक्षा की स्थिति ऐसी है कि महीने में शायद ही कोई दिन बाकी रहता हो जिस पर कोई  घटना न हो ।

यातायात माह में दो दिन में यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए दो दर्दनाक हादसे जिसमे एक मे आगरा के युवा उद्यमी की दुर्घटना में मौत और अगले ही दिन हिमाचल प्रदेश  से आगरा टूर के लिए आ रही स्कूल बस हादसा पिछली सरकारों और मौजूदा सरकार की नाकामियों को दिखाने के लिए पर्याप्त हैं की कैसे एक्सप्रेसवे मौत के रनवे बन रहे हैं।

इसलिए  देश की मौजूदा सरकार ( केंद्र और राज्य) को चाहिए कि वो अपना ध्यान  देश की जनता की सुरक्षा को लेकर इंतजाम पर केंद्रित करे।


ये मेरे विचार हैं आपके विचारों का स्वागत है।

No comments:

Post a Comment

हिंदी - मेरी प्यारी भाषा

हिंदीदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं हिंदी भाषा है, बोली है, ज़बान है, हिंदी से देश का मान-सम्मान है। हिंदी का सांस्कृतिक और वैचारिक महत्व...